शिक्षा

सभी लड़कियों को विद्यालय जाने का अवसर नहीं मिलता। लड़कियों के लिए शिक्षा तक समान पहुंच एक मानवाधिकार है, और यह अन्य क्षेत्रों में प्रगति करने का माध्यम भी है। पूरे विश्व में 140 मिलियन बच्चे विद्यालय नहीं जाते- इनमें से आधे से अधिक लड़कियां हैं।

तथ्य

  • कई देशों में छठे ग्रेड में पहुँचने से पहले आधी से अधिक लड़कियां विद्यालय छोड़ देती हैं।
  • लड़कियों को प्राय: सामाजिक अलगाव और कई सेवाओं तक पहुँच की कमी का सामना करना पड़ता है। उदाहरण के लिए साथी शिक्षण कार्यक्रम, चाहे ये विद्यालय-आधारित न हों, के शहरी लड़कियों तक पहुँचने की संभावना नहीं है जो अधिकतर घर तक सीमित होती हैं।
  • विद्यालय का शुल्क, विद्यालय की ओर से दी जाने वाली सामग्री तथा अनिवार्य यूनिफॉर्म का मूल्य, अथवा घर तथा विद्यालय के बीच लंबी दूरी सहित ऐसी कई बाधाएँ हैं जो लड़कियों को शिक्षा प्राप्त करने से रोकती हैं।
  • विकासशील देशों में लड़कियों के लिए विद्यालय जाना शिक्षित होने के एक अवसर से कहीं अधिक हो सकता है – इसका अर्थ लंबे कार्य समय से बचना, स्वस्थ तथा सुरक्षित रहना, और एक रोजगार प्राप्त करने की संभावना हो सकता है जो अन्यथा संभव नहीं होता।

Girl Up and the Global Girls Alliance

The Global Girls Alliance, a program of the Obama Foundation, seeks to empower adolescent girls around the world through education, allowing them to achieve their full potential and transform their families, communities, and countries. The Alliance engages people around the world to take action to help adolescent girls and the grassroots leaders working to educate them.

Girl Up और संयुक्त राष्ट्र

Girl Up यह सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के साथ काम कर रहा है कि किशोरियों को गुणवत्तापारक शिक्षा तथा पूर्ण विद्यालयी शिक्षा (नर्सरी स्कूल से हाई स्कूल तक) प्राप्त हो सके। एक लड़की को शिक्षा देने का अर्थ है:

  • वह स्वस्थ होती है – एक शिक्षित लड़की के स्वास्थ्य सेवा प्राप्त करने, देर से विवाह करने तथा कम बच्चे पैदा करने की अधिक संभावना होती है।
  • वह आर्थिक रूप से सशक्त होती है – एक शिक्षित लड़की अधिक पैसा कमाएगी, अपने पारिश्रमिक का 80-90 प्रतिशत वापस अपने परिवार तथा समुदाय में निवेश करेगी और गरीबी के चक्र को तोड़ने में सहायक होगी।
  • वह लीडर बनने के लिए तैयार होती है – एक शिक्षित लड़की अपने समुदाय में अधिक सक्रिय होगी, निर्णय लेने के लिए अधिक तैयार होगी और उसमें अपनी स्वयं की क्षमताओं के प्रति अधिक आत्म-विश्वास होगा।

लड़कियों की शिक्षा के सकारात्मक प्रभाव पीढ़ियों तक जाते हुए दर्शाए गए हैं, जिससे महिलाओं, उनके बच्चों और अंतत: उनके नाती-पोतों को बेहतर स्वास्थ्य प्राप्त होता है।


इथोपिया

इथियोपिया में रह रहे शरणार्थी परिवारों को काम करने की अनुमति नहीं दी जाती जिससे गरीबी आती है जिसका प्राय: यह परिणाम होता है कि लड़कियां विद्यालय नहीं जा पातीं। बहुत से परिवार विद्यालय की यूनिफॉर्म और किताबों की लागत नहीं उठा सकते। वे अनिवार्य आवश्यकताओं जैसे खाना तथा शरणस्थल और लड़कियों की शिक्षा की बजाय लड़कों को विद्यालय भेजने को प्राथमिकता देते हैं। Girl Up की सहायता से UN यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है कि इथियोपिया में शरणार्थी लड़कियां स्वस्थ, सुरक्षित तथा शिक्षित हों। लड़कियों को विद्यालय संबंधी शिक्षण-सामग्री, रात को पढ़ने के लिए सौर लैंप, और विद्यालय जाने के लिए छात्रवृत्ति प्राप्त होती है। इस कार्यक्रम के तहत शिक्षण वातावरण को सुरक्षित तथा स्वस्थ बनाए रखने के लिए शौचालय भी बनाए जाते हैं और विद्यालयों में जल की उपलब्धता बनाई जाती है।

गुआटेमाला

औसतन, ऐसे क्षेत्रों में रहने वाली लड़कियां जहां Girl Up विद्यालयी शिक्षा संबंधी प्रयासों में तीन वर्ष से कम अवधि से सहयोग कार्यक्रम प्रचालित कर रहा है। विद्यालयी शिक्षा प्राप्त नहीं करने वाली लड़कियां एक अंधकारमय भविष्य का सामना करती हैं; पढ़ना और लिखना सीखने की बजाय उनके द्वारा जल्दी विवाह तथा जल्दी बच्चे पैदा करने का अनुभव प्राप्त किए जाने की अधिक संभावना होती है। Girl Up ग्वाटेमाला के दो सर्वाधिक बहिष्कृत तथा संवेदनशील क्षेत्रों – टोटोनिकेपन और हूहूटेनांगों में UN कार्यक्रमों में सहयोग करता है। जिन कार्यक्रमों में सहयोग दिया जा रहा है उनमें सीखने को आसान बनाने के लिए स्थानीय, देशी भाषा में शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराना और विद्यालय छोड़ने के लिए मजबूर होने वाली लड़कियों को दूसरा अवसर देना शामिल हैं।

लाइबेरिया

14-वर्ष लंबे गृह युद्ध से बाहर आने के बाद लाइबेरिया में बहुत सारी लड़कियों को विद्यालय जाने का अवसर नहीं मिला है अथवा उन्होंने अपनी किशोरावस्था के बाद के समय में भी विद्यालय जाना शुरू नहीं किया है। 10 से 14 वर्ष के बीच की आयु की 40 प्रतिशत से अधिक लड़कियों ने औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं की है। Girl Up ऐसे UN कार्यक्रमों में सहयोग करता है जो अभिभावकों, अध्यापकों तथा PTAs को लड़कियों को विद्यालय में नामांकित करने, विद्यालय यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने और विद्यालय नहीं जाने वाली लड़कियों के लिए साक्षरता तथा गणनात्मक कौशल कक्षाएं भी आयोजित करने के लिए प्रेरित करने पर जोर देते हैं।

मलावी

मलावी शिक्षा और अत्यधिक गरीबी के संबंध में विश्व में सबसे खराब रिकॉर्ड वाले देशों में से एक है। बहुत-सी लड़कियों को विद्यालय शुल्क का भुगतान न कर पाने, आय के अर्जन में सहायता की आवश्यकता और जल्दी विवाह करने तथा जल्दी बच्चे पैदा करने से होने वाली परेशानियों के कारण अपनी विद्यालयी शिक्षा बीच में ही छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है। UN के साथ-साथ Girl Up इन लड़कियों को पढ़ना तथा लिखना सीखने का अवसर देता है। Girl Up यह भी सुनिश्चित करता है कि उपर्युक्त समस्याओं का सामना करने वाली लड़कियों के पास विद्यालय के शुल्क का भुगतान करने तथा यूनिफॉर्म खरीदने के लिए निधि हो। केवल लड़कियों के लिए आयोजित किए जाने वाले विज्ञान कैंप ऐसे आदर्श तथा कक्षाएँ उपलब्ध कराते हैं जो विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग तथा गणित में लड़कियों की भागीदारी बढ़ाते हैं।

भारत

विश्व में भारत में किशोरों की जनसंख्या सर्वाधिक है।  दुर्भाग्य से इस देश में किशोरियों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।  प्राय: लड़कियों को विद्यालय जाने की अनुमति नहीं दी जाती, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में।  Girl Up भारत के सर्वाधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रों में से एक राजस्थान में किशोरियों के लिए UNFPA की कार्रवाई संबंधी प्रयास का समर्थन करता है।  इस प्रयास का एक मुख्य लक्ष्य लड़कियों और महिलाओं के लिए जीवन कौशल तथा रोजगार कौशल उपलब्ध कराना और अधिकाधिक लड़कियों, विशेष रूप से जिन्हें विद्यालय में नामांकित नहीं किया गया है, को शिक्षा उपलब्ध कराना है।  इसके अतिरिक्त इस प्रयास के तहत किशोर साथी शिक्षकों का एक नेटवर्क बनाया जाता है ताकि लड़कियां अन्य लड़कियों तक पहुँचने तथा उन्हें शिक्षित करने में सहायता कर सकें।