अब्दुह ग्रेस विलियम, युगांडा

ये एक शरणार्थी और अध्यापक अब्दुह ग्रेस विलियम का एक साक्षात्कार है जो दक्षिण सुडान से बाहर निकली और वर्तमान में युगांडा में शरणार्थी कैम्पों में पढ़ाती हैं।

मैं युगांडा में 3 महीने से पढ़ा रही हूं। दक्षिण सूडान से यहां आने में मुझे दो सप्ताह लग गए। मैं लगभग 1,000 लड़कों और लड़कियों को पढ़ाती हूं। अकेले एक कक्षा ही में आमतौर पर 100 और इससे अधिक विद्यार्थी भी होते है। निचली कक्षा में आप पाएंगे कि लड़कों की तुलना में लड़कियां अधिक हैं, और जब आप ऊपरी कक्षाओं में जाएंगे, तो आप पाएंगे कि लड़कियों की संख्या कम हैं। दक्षिण सूडान में जल्दी विवाह की समस्या भी व्यापत है और आप यह भी पाते है कि माता-पिता लड़कियों की शादी करने की कोशिश करते है और स्वयं के लिए दहेज रख लेते हैं।

अन्य शिक्षक और मैं भी लड़कियों से हमेशा स्कूल में आने के बारे में बात करती हूं - यहां तक कि पुरुष शिक्षक भी लड़कियों को स्कूल में आने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। हम उन्हें बताते हैं 'अगर आप स्कूल आते हैं तो आप दोस्त बना सकते है, यहाँ तक कि लड़कों के साथ भी दोस्त कर सकते हैं। आप एक दूसरे से सीखेंगे'। शिक्षक के रूप में, हम उन्हें कम आयु में विवाह के प्रति हतोत्साहित करते हैं और हम कम आयु में विवाह के नुकसान के बारे में बताते हैं। हम देखते है कि कम उम्र में बच्चे की माँ बनने वाली लड़कियों को कुपोषण और गरीबी का सामना करना पड़ता है। यहाँ तक कि लड़कियों को कम उम्र में छोड भी दिया जाता है; लड़कियाँ सबसे अधिक पीड़ित हैं।

मेरे जैसे शिक्षक हमेशा लड़कियों को घर और स्कूल में एक दूसरे के प्रति सहयोगी बनने की सलाह देते हैं। हम माता-पिता को स्कूल में बुलाते हैं और उन्हें बताते हैं, 'आपको लड़कियों को घर पर अध्ययन करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्हें अच्छी तरह से अध्ययन करने का मौका दें ताकि वे लड़कों के समान स्तर तक पहुंच सकें।'

जब लड़कियां स्कूल छोड़ देती हैं, तब उन्हें गरीबी का सामना करना पड़ता है। कभी-कभी आपको ऐसी लड़की मिलती है जो अध्ययन करना चाहती है, लेकिन समस्या यह है कि उनके पास पैसे की कमी है। कभी-कभी लड़की को सैनिटरी पैड की कमी होगी और उसे यह स्कूल से नहीं मिलेगा। इसी कारण, लड़की स्कूल जाने के प्रति हतोत्साहित होगी और घर पर रहना चाहेगी। लड़कियों के लिए ये बुनियादी जरूरतें हैं और इसके बगैर रहना मुश्किल है। तब वह लड़की एक ऐसे लड़के से शादी करने की सोचेगी, जो उसकी सहायता करें और यह गलत है।

मुझे पढ़ाना सबसे ज्यादा पसंद है लेकिन यहां शिक्षण अलग है। बच्चे कक्षाओं में भरे हुए होते हैं और उन्हें सीमित पाठ्यपुस्तकों को साझा करना पड़ता है। यहां एक शिक्षक होने के नाते यह मुश्किल है क्योंकि कक्षा बहुत बड़ी होती है और मुझे डर है कि हर एक छात्र समझ नहीं पाता होगा कि मैं क्या पढ़ा रही हूं क्योंकि मैं उन पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान नहीं दे सकती। शिक्षक और विद्यार्थियों के अनुपात में संशोधन की आवश्यकता है ताकि हम शिक्षक के रूप में हमारे शिक्षण का आनंद ले सकें और लड़कियां बेहतर रूप से सीख सकें।

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