कोमल, भारत

कोमल 1

अट्टा-सट्टा भारत में उस समुदाय में विनिमय विवाह का यही नाम है जहां कोमल रहती है।

कोमल एक ऐसी उत्सुक छात्रा थी, जो टीवी देखने की तुलना में किताब पढ़ना ज्यादा पसंद करती थी । उसने कॉलेज जाने और अच्छी नौकरी पाने का सपना देखा था। लेकिन, 16 साल की छोटी उम्र में ही कोमल के माता-पिता ने उसके भाई के लिए दुल्हन के बदले में उसकी शादी कर दी।

दुल्हन के लिए एक दुल्हन। अट्टा-सट्टा

16 वर्ष में ही शादी से कोमल को अचानक एक ऐसे भविष्य का सामना करना पड़ा जो उसकी कल्पना से बहुत अलग था। उसने आशा थी कि उसका नया पति उसे अपनी पढ़ाई पूरी करने की अनुमति देगा, लेकिन वह 17 साल की उम्र से पहले ही गर्भवती हो गई।

"तब से, मुझे शायद ही कभी घर से बाहर निकलने की इजाजत दी गई है। कोमल बताती है, हर कोई खरीदारी करने, फिल्म देखने और पड़ोस के कार्यक्रमों में जाता है, पर मैं नहीं जा सकती ।” "कभी-कभी, जब दूसरे लोग घर पर नहीं होते हैं, तब मैं अपनी पुरानी स्कूल की किताबें पढ़ती थी, और बच्चे को संभालती थी और रोती थी।"

किसी भी लड़की को स्कूल छोड़ने, एक बच्चा होते हुए भी शादी करने अथवा उसके तैयार होने से पहले गर्भधारण के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए । लेकिन कोमल की ही तरह, भारत में बहुत-सी युवा लड़कियों का यही जीवन है। दरअसल, 6-16 वर्ष की आयु की 70% लड़कियां स्कूल छोड़ देती हैं। और आज एक तिहाई ऐसी महिलाएं भारत में रहती हैं जिनकी शादी 18 साल से पहले कर दी गई थी।

भारत के कुछ स्थानों पर, बेटों को जन्म देने को ज्यादा महत्व दिया जाता है; लड़कियों को अक्सर अपने परिवारों पर वित्तीय बोझ माना जाता है, और इन पर खर्च करना व्यर्थ माना जाता है। इसलिए जब कोमल ने एक लड़की को जन्म दिया, तो उसे अपने आस-पास के लोगों के क्रोध का सामना करना पड़ा । उसे अपनी बेटी से बेहद प्यार था, और फिर भी उसे बेटा नहीं जनने के लिए दोषी ठहराया गया था।

हालाँकि कोमल को अपनी भविष्य की योजनाओं को त्यागने और स्वयं एक बच्ची होते हुए भी परिवार बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा, लेकिन उसकी बेटी या उसकी तरह के हजारों अन्य लड़कियों के लिए बहुत देर नहीं हुई है।

कोमल बताती है, "उम्मीद है कि अट्टा-सट्टा और बाल विवाह जैसे रीति-रिवाज मेरी बेटी के बड़े होने तक पूरी तरह से समाप्त हो जाएंगे, और वह अपनी शिक्षा पूरी कर सकेगी और जब वह चाहेगी तभी शादी कर सकेगी।"

लड़कियों को हर जगह अपने जीवन को नियंत्रित करने और अपने भविष्य को बनाने में सक्षम होना चाहिए। जब कोई लड़की बाल विवाह के लिए नहीं और शिक्षा के लिए हाँ नहीं कह सकती है, तो उसका प्रभाव उसके परिवार, उसके देश और हमारी दुनिया पर पड़ता है।

भारत कोमल जैसी प्रतिभाशाली और आशावादी लड़कियों से भरा हुआ है जिन्हें पढ़ना पसंद है, स्कूल जाना और कड़ी मेहनत करना पसंद है। आइए हम पहला कदम उठाकर बेहतर दुनिया बनाने का काम करें: लड़की को सशक्त बनाना

वर्ष 2015 में, Girl Up ने भारत में युवा लड़कियों तक पहुंचने और सहायता के लिए हमारे धन एकत्र करने के प्रयासों का विस्तार करने का रोमांचक निर्णय लिया। UNFPA द्वारा संचालित और Girl Up द्वारा वित्तपोषित, यह नया कार्यक्रम लड़कियों के अधिकारों की रक्षा करने और लड़कियों के बाल विवाह में देरी करने में मदद करता है। स्कूल से बाहर की लड़कियों को लक्षित करने पर जोर देने सहित, यह पहल भारत के राजस्थान क्षेत्र में लड़कियों को महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मुद्दों के बारे में शिक्षित करेगी और उन्हें अपने जीवन और भविष्य पर नियंत्रण रखने के लिए आवश्यक संसाधनों तक पहुंच प्रदान करेगी ।

कार्यक्रम के बारे में और जानें।